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टैगोर के शेरों से सूफियों की रोशन आंखें झांकती हैं, वे कहते थे अपनी आंखें खोल कि तेरा खुदा कहीं एक जगह नहीं रविंद्रनाथ टैगोर बहुत बड़े शायर और गीतकार थे। उन्होंने एक हजार नज्में और दो हजार गीत लिखे। कुछ लोगों का कहना है कि उनके गीतों और नज्मों की तादाद 5 हजार के करीब है। उनकी कविताओं के हमें 50 संकलन मिलते हैं। उनकी कहानियों के भी कई संकलन हैं। बंगाली भाषा का साहित्य उनकी कहानियों के बगैर मुफलिस और खाली है। उन्होंने ड्रामे, नृत्य नाटिकाएं, नाटिकाएं, सैकड़ों लेख, पत्र, सफरनामे और दो हिस्सों में अपनी आत्मकथा लिखी। पहला हिस्सा अधेड़ावस्था में और दूसरा हिस्सा उस वक्त जब उनका सफर-ए-जिंदगी अपने आखिरी दौर में था या कह लें कि तमाम हो रहा था। गीतांजलि का अंग्रेजी अनुवाद पश्चिम में पहुंचा तो टैगोर सब तरफ शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच गए और उन्हें अदबी नोबेल प्राइज दिया गया। उनका मुकाम बहुत उंचा हो गया। टैगोर के बारे में लिखा गया कि उनके शेरों से सूफियों की रोशन आंखें झांकती हैं। ये दुरुस्त है कि टैगोर की नज्मों और गीतों में खुदा का तसव्वुर झलकता है, लेकिन ये वो खुदा नहीं है कि जिसे मंदिरों या मस्जिदों में तलाश किया जाए। टैगोर ने लिखा है कि अपनी आंखें खोल तेरा खुदा कहीं एक जगह नहीं है। वो हर उस जगह है जहां किसान हल चला रहा है, मजदूर पत्थर तोड़ रहा है, वो धूप और ताप में उनके साथ खड़ा है। टैगोर जिन्होंने 15 साल की उम्र में शेक्सपियर की एक कहानी का अनुवाद बांग्ला में किया था, कई अदीबों को पढ़ चुके थे। उन्होंने अदब के हर चश्मे से अपनी प्यास बुझाई और इसीलिए हमें उनकी नज्मों, कहानियों, उनके लेखों में किसी बड़ी दरिया के फैलाव का मंज़र नजर आता है। जब फ्रॉस्ट ने टैगोर के साहित्य का अनुवाद रूसी में किया तो उनकी शायरी के शानदार धारे को दाद देते हुए गंगा के बहाव की शक्ल दे दी। टैगोर का जहन पश्चिमी तहजीब से जुड़ा था, जिसमें पश्चिम का अदब और साहित्य था। खुदा और महबूब को एक मानने की वजह से पश्चिम से उनका रिश्ता गहरा था। टैगोर की कहानियां, उनकी शायरी, उनके ड्रामे, उनके नॉवेल हमें एक ऐसे जहां से मिलाते हैं जो बिल्कुल अलग है। साल 1910 में उनका नॉवेल ‘गोरा’ पब्लिश हुआ जिसमें मोहब्बत की बहुत ही सादी कहानी है, लेकिन उसके जरिए जात-पात की व्यवस्था पर गहरा वार किया गया है। यह बगैर कुछ कहे यह भी बताती है कि 1857 के फौरन बाद अमीर, जागीरदार और मनसबदार कहलाने वाले लोग वही थे, जिन्होंने जंग के जमाने में हंगामों के वक्त अंग्रेजों की जानें बचाई थीं और उनके बदले में इनाम पाया था। नॉवेल का ऐसा ही एक अहम किरदार गोरा का है जो एक दुनियादार शख्स है और उतना ही सख्त भी है। उसे जुनून की हद तक अपने ब्राह्मण होने पर नाज है। लेकिन नॉवेल के आखिर में उसके जुनून और जाति के अहं की दीवार उसी पर आ गिरती है, जब उसे मालूम चलता है कि वह तो दरअसल हिंदुस्तानी ही नहीं है। उसकी आयरिश मां 1857 के जमाने में उसे जन्म देते हुए खत्म हो गई थी, जबकि उसका अंग्रेज बाप हिंदुस्तान की जंगे आजादी के वक्त मारा गया था। उसकी परवरिश एक ब्राह्मण घराने में हुई, इसलिए वह खुद को ब्राह्मण समझता रहा। उसे गोद लेने वाली बांझ मां ने उससे सच छिपाया। गोरा को अंग्रेजों और क्रिश्चियनों से नफरत थी। वह ब्राह्मणों के अलावा हर एक को कमतर समझता था। लेकिन असल में जब उसे हकीकत मालूम चलती है तो वो यह कहता है कि आज मैं वाकई हिंदुस्तानी हूं और हिंदुस्तान का हर मजहब मेरा मजहब है, हर फिरका मेरा फिरका है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today साहित्य और विज्ञान की दो महान हस्तियां रवींद्रनाथ टैगारे और अल्बर्ट आइंस्टाइन, फोटो 1930 का (स्रोत : यूनेस्को गैलरी) https://ift.tt/32fxJeV
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फिल्मी स्क्रीन पर गणपति बप्पा, कोरोना हमें गणपति के गीतों और उनके उत्सव को याद करने से नहीं रोक सकता हर साल गणेश चतुर्थी आते ही जगह-जगह लगे पांडाल गणपति पर बने गीतों और भजनों से गुंजायमान हो जाते हैं। लेकिन इस साल कोविड महामारी के कारण हालात अलग हैं। न पांडाल है, न ही उनमें बजने वाले गीत। परंतु यह बीमारी हमें हिंदी फिल्मों में आए गणपति के गीतों और उनके उत्सव को याद करने से तो नहीं रोक सकती ना। 1980 की फिल्म ‘हमसे बढ़कर कौन’ के गीत ‘देवा हो देवा’ या फिर इसी साल आई एक अन्य फिल्म ‘टक्कर’ के गीत ‘मूर्ति गणेश की, अंदर दौलत देश की’ को कौन भूल सकता है। आश्चर्यजनक बात यह है कि चाहे गाने हों या गणेश विजर्सन से जुड़े अन्य दृश्य, फिल्मों में इनके फिल्मांकन का संबंध भक्तिभाव से कम, ड्रामेटिक सीक्वेंस से ज्यादा रहा है। साल 1981 में श्याम बेनेगल की फिल्म ‘कलयुग’ एक ऐसी पहली फिल्म थी जिसमें गणेश विसर्जन के जुलूस को इतनी भव्यता के साथ प्रदर्शित किया गया था। फिल्म का हीरो शशि कपूर जुलूस की भीड़ में फंस जाता है। सड़कों पर जो कोलाहल होता है, वो हीरो के दिल में अशांति के रूप में प्रतिध्वनित होता है। साल 1983 में आई सुनील दत्त की फिल्म ‘दर्द का रिश्ता’ उनकी ही व्यक्तिगत जिंदगी से प्रेरित थी। फिल्म में उनकी बेटी खुशबू अस्पताल में कैंसर का सामना कर रही है जहां वो देखती है कि भगवान गणेश उसके घर आ रहे हैं। पिता अस्पताल में ही खुशबू के बिस्तर के पास गणेश की प्रतिमा रख देते हैं और इस तरह खुशबू शांति के साथ दुनिया को अलविदा कर देती है। निर्देशक मुकुल आनंद की 1990 की फिल्म ‘अग्निपथ’ का क्लाइमेक्स भी गणेश विसर्जन जुलूस के साथ चरम पर पहुंचता है जब समुद्र के किनारे उमड़ी भारी भीड़ के बीच अमिताभ बच्चन को चाकू मार दिया जाता है। इसी तरह 1998 में आई रामगोपाल वर्मा की ‘सत्या’ में विसर्जन जुलूस के शोरगुल में इस बात का खुलासा होता है कि फिल्म का हीरो तो असल में अपराधी है और उसकी प्रेमिका उर्मिला मातोंडकर भौंचक निगाहों से उसे देखती ही रह जाती है। 1997 में आई आदित्य चोपड़ा की मूवी ‘दिल तो पागल है’ में गणेश की प्रतिमा प्रेम का माध्यम बन जाती है। फिल्म में माधुरी की डांस टीचर अरुणा ईरानी को यह पता चलता है कि माधुरी और हीरो शाहरुख एक-दूसरे से प्यार तो करते हैं, लेकिन उसका इजहार नहीं कर पा रहे हैं। तब अरुणा ईरानी दोनों को अलग-अलग गणेश प्रतिमा देकर कहती हैं कि गणपति ही दोनों को प्रेम का रास्ता दिखाएंगे। भावना सोमाया, जानी-मानी फिल्म लेखिका, समीक्षक और इतिहासकार हैं। ‘माय फ्रेंड गणेशा’ जहां गणेश प्रतिमा और बच्चे के बीच की अद्भुत बॉन्डिंग दिखाती है, वहीं फिल्म निर्माता फरहान अख्तर और करण जौहर के लिए गणेश उत्सव 'डॉन' और 'अग्निपथ' फिल्मों के रिमेक में शाहरुख और रितिक रोशन के लिए एक डॉन्स का बहाना बनता है। फिल्मी दुनिया के कई लोग हर साल गणेश प्रतिमा की स्थापना करते आ रहे हैं। कोई अपने घर में तो कोई अपने कार्यस्थल पर। कोई बगैर किसी धूम-धड़ाके के, शांति के साथ तो कोई धूमधाम से गणेश स्थापना करते हैं। नितिन मुकेश के घर सभी सेलेब्स जाते हैं और उनका पूरा आशियाना संगीत की धुन व पकवानों की खुशबू से भर उठता है। इसी तरह अनिल कपूर की पत्नी सुनीता भी गणेश चतुर्थी को विशेष शाम आयोजित करती हैं। इस दिन संजय लीला भंसाली खास गुजराती लंच आयोजित करते है। ‘भंसाली गणेशा’ के लिए खास डिजाइन में खास कपड़े होते रहे हैं, जिसकी पूरी व्यवस्था उनकी मां लीलाबेन करती आईं हैं। गणेश उत्सव में भाग लेने के लिए मैं 90 के दशक से नीतू और ऋषि कपूर के घर जाती रही हूं। उन्होंने पहली बार गणेश की स्थापना तब की थी, जब रणबीर और रिद्धिमा बहुत ही छोटे थे। कुछ ही सालों में वे अपने नए बंगले में रहने को चले गए। बीते दो साल से वे अपने एक अस्थाई अपार्टमेंट में रह रहे थे। हालांकि गणेशजी का घर यानी वो चांदी का मंदिर कभी नहीं बदला। दो साल पहले उत्सव के दिनों में ही ऋषि कपूर के ढेर सारे टेस्ट हुए थे। पिछले वर्ष सालों में पहली बार ऐसा हुआ था, जब गणेशजी का स्वागत करने के लिए घर पर कोई नहीं था। क्या नीतू कपूर के घर में इस साल गणेशजी आएंगे? मुझे इसका अंदाजा नहीं है। लेकिन चाहे गणेशजी उनके घर आएं या ना आएं, मैं उनसे मिलने जरूर जाऊंगी। लेकिन क्या ऋषि कपूर के बगैर भी त्योहार वैसा ही रहेगा जैसा हर साल होता था। मुझे नहीं लगता। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Ganpati Bappa, Corona on film screen can't stop us from remembering Ganpati's songs and their celebration https://ift.tt/3b0N9rH
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हाउस कीपर नीरज का खुलासा- 8 जून की रात रिया मैम बहुत गुस्से में थीं, उन्होंने बैग पैक कराया और बिना डिनर किए अपने भाई के साथ चली गईं दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के हाउस कीपर रहे नीरज सिंह का एक बयान मीडिया में वायरल हो रहा है, जो उन्होंने पुलिस की पूछताछ में दिया था। नीरज ने इसमें 8 जून की कहानी सुनाई है। वही दिन, जब रिया सुशांत का घर छोड़कर चली गई थीं। नीरज के मुताबिक, उस रात रिया इतने गुस्से में थीं कि बिना डिनर किए बैग पैक कर अपने भाई के साथ रवाना हो गई थीं। तब डिनर सर्व करने की तैयार कर रहे थे नीरज नीरज कहते हैं, "8 जून को केशव (कुक) ने सभी के लिए डिनर बनाया। हम सर (सुशांत) और रिया मैम के लिए डिनर सर्व करने की तैयारी कर रहे थे। तभी अचानक रिया मैम ने मुझे आवाज दी और उनका बैग पैक करने को कहा। वे बहुत गुस्से में दिख रही थीं। उन्होंने मुझसे कहा कि अलमारी से उनके सारे कपड़े बैग में पैक कर दूं। बाद में वे बिना डिनर किए ही अपने भाई शोविक चक्रवर्ती के साथ चली गईं। तब सुशांत सर पूरे टाइम कमरे में बैठे रहे। रिया मैम के जाने के बाद उसी रात सुशांत सर की बहन मीतू सिंह घर आईं। टैरेस में सुशांत के साथ वर्कआउट करती थीं रिया नीरज ने अपने बयान में यह भी बताया कि लॉकडाउन शुरू होने के बाद रिया माउंट ब्लैंक (जहां सुशांत का फ्लैट था) में शिफ्ट हो गई थीं। बकौल नीरज, "वे सर के साथ रह रही थीं। लेकिन कभी-कभी एक-दो दिन के लिए पैरेंट्स से मिलने चली जाती थीं या फिर पैरेंट्स उनसे मिलने आ जाया करते थे। लॉकडाउन के दौरान रिया मैम और सुशांत सर सुबह उठने के बाद ब्लैक कॉफी लेते थे और फिर वर्कआउट के लिए टैरेस पर चले जाते थे। लंच के बाद कभी-कभी वे टैरेस में योगा और म्यूजिक इक्विपमेंट रखने को कहते थे। फिर उनके वहां से जाने के बाद मैं टैरेस साफ करता था। केशव डिनर बनाता था और फिर सर सोने चले जाते थे। यह उनका डेली रुटीन था।" सुशांत का घर छोड़ते ही रिया ने किया था महेश भट्ट को मैसेज पिछले दिनों रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट की वॉट्सऐप चैट सामने आई, जो 8 जून को रात 7:43 से 8:08 बजे के बीच की है। रिया ने सुशांत का घर छोड़ते ही भट्ट को इस बारे में इन्फॉर्म किया था। उन्होंने खुद को भट्ट के निर्देशन में बनी उनकी फिल्म 'जलेबी' के किरदार आयशा के रूप में मेंशन किया है और लिखा था कि वे आगे बढ़ गई हैं। तब महेश भट्ट ने उन्हें पीछे मुड़कर न देखने की सलाह दी थी। दोनों के बीच हुई बातचीत कुछ इस प्रकार थी:- रिया चक्रवर्ती : भारी दिल और राहत की भावना के साथ आयशा आगे बढ़ गई है सर...हमारा आखिरी कॉल जगाने वाला कॉल था। आप मेरे एंजल हैं। आप तब भी थे और अब भी हैं। महेश भट्ट: पीछे मुड़कर मत देखना। इसे संभव बनाओ, जो कि जरूरी है। आपके पिता को मेरा प्यार। उन्हें बहुत खुशी होगी। रिया चक्रवर्ती: कुछ साहस मिला सर और आपने उस दिन फोन पर मेरे पिता के बारे में जो कहा, उसने मुझे स्ट्रॉन्ग होने के लिए प्रेरित किया। हमेशा खास होने के लिए उन्होंने आपको प्यार और शुक्रिया भेजा है। महेश भट्ट: तुम मेरी बच्ची हो। मैं हल्का महसूस कर रहा हूं। रिया चक्रवर्ती : आह...शब्द नहीं है सर...दिल भरा हुआ है। लेकिन आपके लिए जो फीलिंग होती है, वह सबसे अच्छी होती है। महेश भट्ट: बहादुर होने के लिए शुक्रिया। रिया चक्रवर्ती : किस्मत का शुक्रिया, जो उसने मुझे आपसे मिला दिया। आप सही हैं। हमारे रास्ते इस दिन के लिए ही मिले थे। सिर्फ एक फिल्म के लिए नहीं, बल्कि कुछ बहुत अलग है। आपके कहा एक-एक शब्द मेरे दिमाग में गूंजता है और आपके असीमित प्यार का गहरा प्रभाव महसूस होता है। महेश भट्ट: हां, हां, हां। अगर मैं काम न आ सका तो मेरे होने का कोई मतलब नहीं है। रिया चक्रवर्ती : आपने मुझे फिर आजाद कर दिया। भगवान की तरह एक ही जिंदगी में दूसरी बार। (संभवतः पहली बार के तौर पर वे उनकी फिल्म 'जलेबी' की बात कर रही हैं) महेश भट्ट : रेस्ट। रिया चक्रवर्ती: आह शांति। महेश भट्ट : हैप्पी बर्थडे। (शायद महेश भट्ट इसे रिया का पुनर्जन्म मान रहे थे।) रिया चक्रवर्ती : हाहा-हाहा...मैं स्माइल कर रही हूं। आई लव यू माय बेस्ट मैन। आपको प्राउड फील कराऊंगी। महेश भट्ट : तुमने पहले ही करा दिया। वाकई। तुमने जो किया, उसके लिए गट्स चाहिए। पीछे मत मुड़ना। 8 जून को लेकर सुशांत के परिवार और रिया की अलग-अलग कहानी 8 जून को लेकर सुशांत के परिवार और रिया की ओर से अलग-अलग कहानी सामने आ चुकी हैं। सुशांत की बहन मीतू की मानें तो रिया ने उन्हें फोन करके फ्लैट पर बुलाया था और कहा था कि सुशांत से उनका झगड़ा हुआ है। जब मीतू वहां पहुंचीं तो रिया जा चुकी थीं। सुशांत ने भी दोनों के झगड़े के बारे में बताया था। मीतू के मुताबिक, वे सुशांत के साथ उनकी मौत से दो दिन पहले 12 जून तक रुकी थीं। लेकिन फिर उन्हें घर लौटना पड़ा था, क्योंकि उनके बच्चे छोटे हैं। रिया की ओर से जो कहानी आई, वह बिल्कुल उलट है। उन्होंने अपने वकील सतीश मानशिंदे के जरिए दावा किया था कि मौत से पहले सुशांत बहुत परेशान थे। वे लगातार रो रहे थे और अपने परिवार को साथ रहने के लिए बुला रहे थे। 8 जून को जब उनकी बड़ी बहन मीतू साथ आकर रहने के लिए तैयार हो गईं तो अभिनेता ने रिया को उनके घर भेज दिया था। सुशांत केस से जुडी ये खबरें भी पढ़ सकते हैं... 1. रिया चक्रवर्ती का नया दावा:एक्ट्रेस के वकील ने कहा- मौत से पहले सुशांत फोन पर रोते थे, परिवार को मुंबई बुला रहे थे, जब उनकी बहन आने को तैयार हुईं तो उन्होंने रिया को उनके घर भेज दिया 2. रिया चक्रवर्ती-महेश भट्ट की वॉट्सऐप चैट वायरल:सुशांत का घर छोड़ने के बाद रिया ने किया था महेश भट्ट को मैसेज, जवाब में भट्ट ने कहा था- पीछे मुड़कर मत देखना 3. महेश भट्ट-रिया चक्रवर्ती के नए वॉट्सऐप चैट:सुशांत का घर छोड़ने के बाद रिया ने लिखा था- आपने मुझे फिर बचा लिया; जब एक्टर की मौत हुई तो भट्ट ने रिया को कॉल करने को कहा था Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today रिया चक्रवर्ती के घर छोड़ने के बाद सुशांत सिंह राजपूत पूरे टाइम अपने कमरे में बैठे रहे थे। https://ift.tt/3j7KejG
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केंद्र सरकार ने फिल्म और टीवी कार्यक्रमों की शूटिंग के लिए SOP जारी किया, फिल्म मेकर अशोक पंडित बोले- उम्मीद है अब उद्योग मुश्किलों में नहीं रहेगा कोरोना दौर के बीच केंद्र सरकार ने फिल्म और टीवी कार्यक्रमों की शूटिंग के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रॉसिजर (एसओपी) जारी कर दिया है। जिसके बाद अब फिल्म और टीवी सीरियल्स की शूटिंग शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने ऐसी अनुमति पहले ही दे दी थी। सरकार के इस फैसले को लेकर केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को धन्यवाद कहा है। अपने ट्वीट में अशोक पंडित ने लिखा, 'फिल्म और टीवी शूटिंग की अनुमति देने के लिए SOP जारी करने पर प्रकाश जावड़ेकर जी (सूचना और प्रसारण मंत्रालय) आपका धन्यवाद। अन्य उद्योगों की तरह ही ये इंडस्ट्री बहुत बुरे समय से गुजर रही है। अब जब केंद्र और राज्य सरकार हमारा समर्थन कर रही हैं, तो हमें यकीन है कि उद्योग अब और मुश्किल में नहीं रहेगा।' मास्क पहनना जरूरी होगा कैमरा फेस करने वाले कलाकारों के अलावा शूटिंग से जुड़े कामों में शामिल लोगों को पब्लिक और वर्कप्लेस पर मास्क पहनना जरूरी होगा। एक-दूसरे के कम से कम 6 फीट की दूरी रखनी होगी। ज्यादा जोखिम वाले कर्मचारियों को पब्लिक कॉन्टैक्ट के फ्रंटलाइन कामों में नहीं लगा सकेंगे। सिर्फ एसिम्प्टोमैटिक लोगों को ही एंट्री मिलेगी सभी एंट्री गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग जरूरी होगी। सिर्फ एसिम्प्टोमैटिक लोगों को भी एंट्री देने की इजाजत होगी। पार्किंग में और शूटिंग कैंपस के सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी होगी। कोरोना से बचने के उपायों को बताने वाले पोस्टर या विजुअल डिस्प्ले भी लगा सकते हैं। टिकट बुकिंग जैसे कामों के लिए कॉन्टैक्ट ट्रांजैक्शन की छूट नहीं दी जाएगी। सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप के इस्तेमाल की सलाह भी दी है। महाराष्ट्र सरकार ने तीन महीने पहले ही दे दी थी इजाजत इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने कुछ शर्तों के साथ 31 मई को राज्य में नॉन कंटेनमेंट जोन में फिल्म, टीवी सीरियल और वेबसीरीज की शूटिंग की इजाजत दे दी थी। राज्य के संस्कृति मंत्रालय ने कहा था कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक ही प्रोड्यूसर्स को प्री-प्रोडक्शन और पोस्ट-प्रोडक्शन का काम करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो काम रोक दिया जाएगा। गाइडलाइन के मुताबिक सरकार ने सेट पर 33 फीसदी क्रू मेंबर के साथ शूटिंग करने की इजाजत दी थी। प्रोड्यूसर्स को महाराष्ट्र फिल्म, थिएटर, कल्चरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, दादा साहब फाल्के चित्रनगरी और मुंबई के बाहर शूटिंग की शुरुआत के लिए जिला कलेक्टरों को आवेदन देना जरूरी किया गया था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today The shooting of films and tv serials can be resumed now while following the norms of social distancing and wearing of masks except for the people who are being recorded on camera: Prakash Javadekar, Union Minister for Information & Broadcasting https://ift.tt/2YpZekZ
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आज रिया चक्रवर्ती से हो सकती है पूछताछ, सुशांत के रूम का लॉक खोलने वाले मोहम्मद रफीक का बयान भी हो सकता है दर्ज सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस में सीबीआई आज रिया चक्रवर्ती से पूछताछ कर सकती है। वे इस पूरे मामले की प्राइम सस्पेक्ट हैं। उन पर सुशांत के खाते से 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी करने और उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि सीबीआई केस बनाना चाहती है। इसलिए एजेंसी के अधिकारी मामले के प्रमुख संदिग्धों से जल्द से जल्द पूछताछ की प्लानिंग में है। चाबी बनाने वाले के बयान भी हो सकते हैं दर्ज रविवार को सीबीआई के अधिकारी उस चाबी बनाने वाले के बयान भी दर्ज कर सकती है, जिसने 14 जून को सुशांत के कमरे का लॉक खोला था। मोहम्मद रफीक नाम के इस शख्स ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में दावा किया है कि सिद्धार्थ पिठानी ने उसे फोन करके बुलाया था और लॉक खुलते ही 2000 रुपए देकर वहां से रवाना कर दिया था। रफीक के मुताबिक, उस वक्त फ्लैट में चार लोग (कुक नीरज, केशव, हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा और फ्लैट-मेट सिद्धार्थ पिठानी) मौजूद थे। लेकिन किसी के चेहरे पर कोई तनाव नहीं था। जब मुंबई पुलिस ने उसे दोबारा उसी फ्लैट पर बुलाया, तब उसे पता चला कि वह कमरा सुशांत सिंह राजपूत का था। सिद्धार्थ पिठानी से फिर से हो सकती है पूछताछ सुशांत के फ्लैट-मेट और दोस्त रहे सिद्धार्थ पिठानी से शनिवार को मुंबई पुलिस ने पूछताछ की थी। रविवार को एक बार फिर उनसे सवाल-जवाब हो सकते हैं। रिपोर्ट्स की मानें सिद्धार्थ पिठानी इकलौते शख्स हैं, जिन्होंने सुशांत को सीलिंग फेन से लटका हुआ देखा था और उन्होंने ही अभिनेता को फंदे से उतारकर बेड पर लिटाया था। शनिवार को क्या हुआ? शनिवार को सीबीआई सुशांत के फ्लैट भी पहुंची। यहां करीब 6 घंटे तक पड़ताल की। सूत्रों के मुताबिक, सुशांत के वजन के बराबर एक डमी को ले जाकर मौत के सीन (14 जून) को रीक्रिएट किया गया। जांच एजेंसी अभिनेता के कुक नीरज सिंह, दीपेश सावंत और सिद्धार्थ पिठानी को भी अपने साथ लेकर गई। अफसरों ने तीनों के बयान कैमरे में दर्ज किए। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने सिद्धार्थ और दीपेश से फंदे में लटकी डमी को ठीक वैसे ही उतारने के लिए कहा जैसा इन्होंने 14 जून को किया था। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पंखा उस डमी का वजन सह सका या नहीं। 30 सदस्यीय टीम ने पूरी बिल्डिंग का मुआयना किया एसपी नूपुर प्रसाद के साथ सीबीआई की टीम के 30 सदस्यों ने सबसे पहले पूरी बिल्डिंग का मुआयना किया। इनमें फोरेंसिक टीम के लोग भी शामिल थे। टीम के कुछ सदस्यों ने छत पर चढ़कर पूरे इलाके, छत, सीढ़ियों की वीडियोग्राफी की है। यह टीम सुशांत के घर 2 बजे पहुंची थी और शाम को 8:20 बजे निकली। इस टीम में नॉट एक्सपर्ट में थे। इन्होंने सिद्धार्थ से पूछा कि सुशांत के गले में फंदा कैसा था। सिद्धार्थ ने डमी के गले में उसी तरह फंदा डालकर जांच टीम को दिखाया। एक टीम ने कूपर अस्पताल का दौरा भी किया सीबीआई की एक अन्य टीम ने शनिवार को कूपर अस्पताल का दौरा किया। यहां सुशांत का पोस्टमॉर्टम हुआ था। पोस्टमॉर्टम करने वाले 5 डॉक्टरों के बयान दर्ज किए। एक अन्य टीम ने बांद्रा थाने का दौरा किया। यहां अभिनेता की मौत की जांच करने वाले मुंबई पुलिस के अधिकारियों से मुलाकात की। ऑटोप्सी रिपोर्ट की जांच करेगी एम्स की टीम एम्स ने सुशांत की ऑटोप्सी रिपोर्ट की जांच के लिए शुक्रवार को 5 फोरेंसिक एक्सपर्ट की का मेडिकल बोर्ड बनाया। सीबीआई ने इस मामले में शुक्रवार को एम्स से राय मांगी थी। एम्स के फोरेंसिक डिपार्टमेंट के हेड डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि ‘‘सुशांत का मर्डर होने के शक के एंगल से भी जांच की जाएगी। विसरा की जांच की जाएगी। सुशांत को डिप्रेशन दूर करने करने के लिए जो दवाएं दी जा रही थीं, उनकी भी एम्स की लैब में जांच होगी।’’ कूपर हॉस्पिटल के डॉक्टर्स पर जल्दबाजी में पोस्टमॉर्टम करने का आरोप लग रहा है। सीबीआई ने इन चीजों को मुंबई पुलिस से अपने कब्जे में लिया सुशांत के 3 मोबाइल फोन, सुशांत का लैपटॉप। वो मग जिसमें सुशांत ने जूस पिया था। सुशांत के कपड़े, जो उन्होंने उस वक्त पहने थे और फंदे के लिए इस्तेमाल किया गया हरे रंग का कपड़ा। ऑटोप्सी और फोरेंसिक रिपोर्ट भी सीबीआई को मिल गई है। सुशांत के घर और फॉर्म हाउस से बरामद डायरी। 13 से 14 जून की सीसीटीवी फुटेज भी सीबीआई को सौंपी गई हैं। रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती और इस केस से जुड़े सभी लोगों की सीडीआर। 56 गवाहों के बयान की कॉपी भी सीबीआई की टीम ने मुंबई पुलिस से ली है। सीबीआई के सामने 3 चुनौतियां सुशांत की मौत को 60 से ज्यादा दिन हो गए हैं। क्राइम सीन पर सबूत पूरी तरह मिट चुके होंगे। सीबीआई के पास सिर्फ मौके से ली गई तस्वीरें ही सहारा होंगी। मुंबई पुलिस का पूरा रिकॉर्ड मराठी भाषा में है और उसे मराठी से इंग्लिश में ट्रांसलेशन कराने में लंबा वक्त लग सकता है। इनमें 56 गवाहों के बयान भी शामिल हैं। सुशांत की मौत का कोई भी चश्मदीद गवाह नहीं है। केवल एक आदमी है जिसने डेड बॉडी को लटके देखा और उसने भी डेड बॉडी उतार दी। ऐसे में डेड बॉडी कहां और कैसे लटकी हुई थी उसके पैर कहां पर थे इन बातों को समझने के लिए भी सीबीआई को मशक्कत करनी पड़ेगी। सुशांत केस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ सकते हैं... 1. सुशांत की मौत का मामला:सीबीआई सुशांत के फ्लैट में साढ़े छह घंटे रही, क्राइम सीन रीक्रिएट किया; पड़ोसी महिला ने कहा- 13 जून की रात को एक्टर के घर की लाइट बंद थी, कुछ गड़बड़ है 2. 14 जून की कहानी, चाबी वाले की जुबानी:सुशांत के घर पर मौजूद सभी लोग रिलैक्स थे, कमरे में नहीं झांकने दिया; बताया- क्यों ताला तोड़ने के लिए चार्ज किया 2 हजार रुपए 3. महेश भट्ट-रिया चक्रवर्ती के नए वॉट्सऐप चैट:सुशांत का घर छोड़ने के बाद रिया ने लिखा था- आपने मुझे फिर बचा लिया; जब एक्टर की मौत हुई तो भट्ट ने रिया को कॉल करने को कहा था Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today रिया चक्रवर्ती सुशांत सिंह राजपूत के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थीं। अभिनेता की मौत से 6 दिन पहले वे उनका घर छोड़ गई थीं। https://ift.tt/2EoU8yn
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8 साल की उम्र से ही मिसेज दिलीप कुमार बनने का सपना देखने लगी थीं सायरा बानो, शादी के बाद मां ना बन पाने की सामने आई थी दर्दनाक वजह वेटरन एक्ट्रेस सायरा बानो का 23 अगस्त को 75वां बर्थडे जन्मदिन है। कई सुपरहिट फिल्मों में काम करने वाली सायरा का दिल 22 साल बड़े दिलीप कुमार पर आया था। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि जब सायरा बानो के साथ दिलीप कुमार को एक फिल्म ऑफर हुई थी तो उन्होंने साथ काम करने से मना कर दिया था। इसकी वजह ये थी दिलीप साहब को लगा था कि उनकी जोड़ी फिल्म में अच्छी नहीं लगेगी क्योंकि दोनों की उम्र में काफी अंतर था। 'बचपन से ही मिसेज दिलीप कुमार बनने का सपना देखा' 1952 में आई फिल्म 'आन' में दिलीप साहब को देखकर सायरा उनसे मोहब्बत करने लगी थी। इस वक्त सायरा की उम्र मात्र 8 साल थी। मिसेज दिलीप कुमार बनने के लिए सायरा ने की तैयारी। दैनिक भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में सायरा ने अपनी लव स्टोरी का जिक्र करते हुए कहा था, 'मैं अपने स्कूल डेज से ही मिसेज दिलीप कुमार बनना चाहती थी। जब मैं छोटी थी और लंदन में स्टडी कर रही थी तबसे ही मेरा इस तरफ रुझान था कि मैं एक दिन मिसेज दिलीप कुमार बनूंगी। मेरी मां ने मुझसे कहा था कि आपको मिसेज दिलीप कुमार बनने के लिए वैसे ही शौक पैदा करने चाहिए, जैसे दिलीप साहब फरमाते हैं। जब मैं हिंदुस्तान आई तो मुझे पता चला कि दिलीप साहब को सितार का बेहद शौक है, तो फिर मैंने भी सितार सीखना शुरू कर दिया। चूंकि दिलीप साहब उर्दू में माहिर हैं तो मैंने भी उर्दू सीखना शुरू किया।'' मेरी मां ने मेरा करियर शुरू होने के बाद मेरा घर बनाने के बारे में सोचा तो उन्होंने वही जगह चुनी जहां से दिलीप साहब का घर पास हो। उनके घर के सामने ही मेरा घर बनवाया गया। यह उनके बंगले से केवल दो बंगले ही दूर था। वो कहते हैं न कि ‘तेरे दर के सामने एक घर बनाऊंगा’। 11 अक्टूबर 1966 को दोनों की शादी हो गई। उस दौरान मैं ‘मेरे प्यार मोहब्बत’ की शूटिंग कर रही थी। 23 अगस्त 1966 का दिन था जब मेरी सालगिरह भी आई और मेरी मां ने उस घर की हाउस वार्मिंग पार्टी भी रखी। मैं फिल्मिस्तान स्टूडियो से शूटिंग करके घर आई तो वहां पार्टी में मेरे को-स्टार्स, डायरेक्टर का जमावड़ा लगा हुआ था। अचानक क्या देखती हूं कि दिलीप साहब खुद आए हैं। मेरे मां ने उन्हें खास इनवाइट किया था। वह मेरे लिए मेरी जिंदगी का सबसे अच्छा गिफ्ट था।'' पार्टी के बाद दोनों का मिलना-जुलना शुरू हुआ और फिर 11 अक्टूबर 1966 को दोनों की शादी हो गई। मां-बाप नहीं बन सके सायरा-दिलीप कुमार दोनों की बेहतरीन लव स्टोरी शादी के अंजाम तक तो पहुंच गई लेकिन इनके माता-पिता बनने का सपना अधूरा रह गया। ऐसा क्यों हुआ इसका खुलासा दिलीप कुमार ने अपनी ऑटोबायोग्राफी 'द सबस्टांस एंड द शैडो' में किया था। 8 महीने की प्रेग्नेंसी में सायरा को ब्लड प्रेशर की शिकायत हुई थी। बुक में दिलीप कुमार ने कहा है, "सच्चाई यह है कि 1972 में सायरा पहली बार प्रेग्नेंट हुईं। यह बेटा था (हमें बाद में पता चला)। 8 महीने की प्रेग्नेंसी में सायरा को ब्लड प्रेशर की शिकायत हुई। इस दौरान पूर्ण रूप से विकसित हो चुके भ्रूण को बचाने के लिए सर्जरी करना संभव नहीं था और दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई।" दिलीप कुमार की मानें तो इस घटना के बाद सायरा कभी प्रेग्नेंट नहीं हो सकीं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Saira Banu 75th birthday special https://ift.tt/2Yt6ht7
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Why We Can’t Stop Loving ‘The Beastmaster’ ketu1982.blogspot.com
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अभिनेता के फैमिली वकील ने कहा- 'कंगना न सुशांत की दोस्त और न ही प्रतिनिधि, वे सिर्फ अपना एजेंडा चला रहीं', एक्ट्रेस बोली- बिकाऊ मीडिया से सावधान सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से कंगना रनोट लगातार उनके लिए न्याय की मांग कर रही हैं। उन्होंने अभिनेता की मौत को बॉलीवुड में फैले नेपोटिज्म और कैम्प-बाजी से जोड़ा था। अब सुशांत के फैमिली वकील विकास सिंह ने एक्ट्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने एक इंटरव्यू में स्पष्ट तौर पर कहा कि कंगना न तो सुशांत की दोस्त हैं और न ही उनकी प्रतिनिधि हैं। वे इंडस्ट्री की एक सामान्य समस्या को उजागर कर रही हैं। कंगना जो कर रहीं, वह सिर्फ अपने लिए कर रहीं: विकास सिंह न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में विकास सिंह ने कहा, "वे (कंगना) जो मुद्दा उठा रही हैं, वही सही है। वे इंडस्ट्री की सामान्य समस्या के बारे में बात कर रही हैं। सुशांत भी इससे (नेपोटिज्म) जूझेंगे होंगे। लेकिन कंगना उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर रही हैं। वे सुशांत का कुछ भी नहीं कर रही हैं। जो कर रही हैं, वह सिर्फ अपने लिए रही हैं।" सिंह का कंगना पर अपना एजेंडा चलाने का आरोप इससे पहले एक अंग्रेजी एंटरटेनमेंट वेबसाइट से बातचीत में सिंह ने कंगना पर अपना एजेंडा चलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था, "वे सिर्फ अपना एजेंडा चला रही हैं और उन लोगों पर निशाना साध रही हैं, जिनके साथ उनके पर्सनल इश्यूज हैं। वे अपनी ही ट्रिप पर जा रही हैं। परिवार की ओर से दर्ज कराई एफआईआर का इन दावों से कोई लेना-देना नहीं है। सुशांत भेदभाव का शिकार हुए होंगे। लेकिन इस केस में यह जांच का प्राइमरी कोर्स नहीं हो सकता। इसका छोटा-मोटा योगदान हो सकता है। लेकिन मुख्य केस यह है कि रिया और उनकी गैंग ने कैसे सुशांत को एक्सप्लॉयट किया और उन्हें खत्म कर दिया?" कंगना का दावा- फैमिली और वकील का उन्हें समर्थन हालांकि, कंगना को लगता है कि सुशांत की फैमिली और वकील उन्हें सपोर्ट करते हैं। उन्होंने विकास सिंह का वीडियो शेयर किया, जिसमें वे उनके बारे में पॉजिटिव बातें कर रहे हैं। एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा, "सुशांत सिंह राजपूत की फैमिली और उनके वकील ने हमेशा मेरे स्ट्रगल का समर्थन किया है।" सावधान रहें।" एक्ट्रेस द्वारा शेयर किए गए वीडियो में विकास सिंह कह रह रहे हैं, "कंगना एकदम सही हैं कि उसने (रिया ने) उस खालीपन का फायदा हुआ, जो सुशांत की जिंदगी में बना दिया गया था। उसने पूरी तरह उनकी जिंदगी और मामलों को टेकओवर कर लिया था। उसने जो किया, वह एफआईआर का हिस्सा है।" इसके अगले ट्वीट में कंगना ने लिखा था, "मूवी माफिया और बिकाऊ मीडिया एक बार फिर से...सुशांत के वकील या फैमिली ने मेरे खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा। लेकिन अफवाहें फैल रही हैं। गिद्ध मीडिया से ## सिंह पहले भी कंगना के नेपोटिज्म के मुद्दे को नकार चुके सुशांत के पिता केके सिंह ने 25 जुलाई को पटना के राजीव नगर पुलिस स्टेशन में रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी और अपने बेटे के खाते से 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया था। उसके बाद विकास सिंह ने कहा था कि इस एफआईआर से कंगना द्वारा उठाए जा रहे नेपोटिज्म के मुद्दे का कोई लेना-देना नहीं है। उस वक्त कंगना कुछ हताश हो गई थीं। उनकी टीम ने ट्विटर पर लिखा था, "दुर्भाग्य से उनका परिवार सिर्फ पैसों के हिस्से पर फोकस कर रहा है और उन सभी इंटरव्यू और पोस्ट को नजरअंदाज कर रहा है, जिनमें सुशांत ने बुली और हरेसमेंट के बारे में लिखा था। जबकि इस केस में पॉलिटिकल नेपो माफिया भी जुड़े हुए हैं।" ## कंगना ने पहले दिन से मामले को नेपोटिज्म से जोड़ा कंगना रनोट ने 14 जून को यह आरोप लगाकर सनसनी फैला दी कि सुशांत की सुसाइड के पीछे करन जौहर और उनकी नेपोटिस्ट गैंग है। उन्होंने कहा था कि सुशांत ने यह कदम उठाकर उन लोगों को जीत दिलवा दी, जो भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देते हैं। फिल्म माफिया हैं और खेमेबाजी में यकीन रखते हैं। एक इंटरव्यू में कंगना ने करन के अलावा आदित्य चोपड़ा, राजीव समंद और महेश भट्ट का नाम भी कैम्प-बाजी करने वाले लोगों में जोड़ा था और सवाल उठाया था कि मुंबई पुलिस इनसे पूछताछ क्यों नहीं करती। इतना ही नहीं, कंगना यह तक कह चुकी हैं कि अगर वे अपने दावे साबित नहीं कर पाएंगी तो अपना पद्मश्री सरकार को वापस करने के लिए तैयार हैं। कंगना रनोट की ये खबरें भी पढ़ सकते हैं... कंगना के निशाने पर अमिताभ:सुशांत केस और राम मंदिर भूमि पूजन पर अमिताभ की चुप्पी पर कंगना ने उठाया सवाल, कहा- यह माफिया का डर है कंगना का बड़ा हमला:दीपिका को बताया डिप्रेशन का धंधा करने वाली, बोलीं- यह कैसा डिप्रेशन, जिसमें वो सजसंवर रहीं, शादी भी कर रहीं? आमिर-अनुष्का पर भी निशाना Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today विकास सिंह पहले भी कंगना द्वारा उठाए गए नेपोटिज्म के मुद्दे को सुशांत सिंह राजपूत की मौत से अलग बता चुके हैं। https://ift.tt/31iYtMe
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अक्षय कुमार की सूर्यवंशी और रणवीर की 83 हो सकती है नेटफ्लिक्स पर रिलीज, रिलायंस ने रिलीज डेट आगे बढ़ाने से किया इनकार मार्च से लेकर अब तक कई फिल्मों की रिलीज डेट लगातार टलती जा रही हैं। महामारी के चलते देश भर में सिनेमाघरों में ताले पड़े हुए हैं ऐसे में सभी फिल्ममेकर्स अब ओटीटी प्लेटफॉर्म की तरफ रुख कर चुके हैं। 'सड़क 2', 'लक्ष्मी बॉम्ब', 'गुंजन सक्सेना' जैसी कई बड़ी फिल्मों के बाद अब रणवीर सिंह की '83' और 'सूर्यवंशी' के भी डिजिटली रिलीज होने की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि मेकर्स दीवाली या क्रिसमस से पहले ही इसे रिलीज करना चाहते हैं फिर चाहे थिएटर खुलें या नहीं। हाल ही में रिलायंस एंटरटेनमेंट के सीईओ शीबाशीश सरकार का एक बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा है, 'हम फिल्म को 100 प्रतिशन थिएटर में ही रिलीज करना चाहते हैं। हालांकि इसी के साथ हम फिल्म को एक समय से ज्यादा पोस्टपोन नहीं कर सकते हैं। हम रिलीज डेट को दीवाली या क्रिसमस से आगे रिलीज नहीं करना चाहते हैं। पहला विकल्प है थिएटर रिलीज अगर सिनेमाघर खुलते हैं और जब ऑडियंस वापस आती है'। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो सकती हैं फिल्में फिल्म क्रिटिक संदीप ने जानकारी देते हुए बताया है कि सूर्यवंशी और 83 द फिल्म दोनों नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो सकती हैं अगर साल के आखिर तक सिनेमाघर नहीं खुलते तो। रिलांयस एंटरटेनमेंट वाले फिल्म को ज्यादा पोस्टपोन नहीं करना चाहते हैं। रोहित शेट्टी के कॉप यूनिवर्स की फिल्म सूर्यवंशी को नवम्बर में दीवाली के आसपास रिलीज करना तय किया गया है। लेकिन सिनेमाघर नहीं खुलते तो इसे सीधे डिजिटल रिलीज किया जाएगा। पहले यह 24 मार्च को रिलीज होने वाली थी मगर उससे पहले ही सिनेमाघर बंद हो गए। इसी तरह 83 भी क्रिसमस तक रिलीज हो जाएगी चाहे थिएटर खुले या नहीं। थिएटर बंद होने से इन फिल्मों ने टेके घुटने थिएटर के बजाय ओटीटी पर फिल्म रिलीज करने का सिलसिला अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना की फिल्म 'गुलाबो- सिताबो' से शुरू हुआ था। इसके बाद 'शकुंतला देवी', 'लूटकेस', 'खुदा हाफिज', 'दिल बेचारा' और 'गुंजन सक्सेना' भी डिजिटली रिलीज की गई हैं। इनके अलावा 'सड़क 2', 'लक्ष्मी बॉम्ब', 'बिग बुल' भी ओटीटी पर आएंगी। '83' और 'सूर्यवंशी' के अलावा वरुण और सारा की 'कुली नं 1' फिल्म भी ओटीटी पर रिलीज हो सकती है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Akshay Kumar's Sooryavanshi and Ranveer's 83 may release on Netflix, Reliance refuses to extend the release date https://ift.tt/32ddcb3
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